The Thought
Hello everyone!
It has been really long i wrote some good poetry. "Khamosh raho" meaning Be Silent is a poem i wrote two days back. It speaks of what i have observed, noticed and realized. I strongly believe that the whole creation has a way of answering you back in a very silent and subtle manner. And the time you get all those answers, you might be overwhelmed by the beauty of the way by which the creation converses with you.
खामोश रहो is a heart piece and will always be one, for i believe it is nothing but a message from the creation itself flowing through a pen on an A4, me being the medium. I hope you have a picture of it by now.
Enjoy!!
खामोश रहो
खामोश रहो
यही सीखा है मैंने
तुम्हें सवालों के जवाब मिल ही जाते हैं
ज़माने को उन के जवाब मिल ही जाते हैं
खामोश रहो
कि ख़ामोशी में हर एहसास छुपा हुआ है
सहनशीलता तो परिहास छुपा हुआ है
खामोश रहो
कि प्रेम ख़ामोशी में ही पलता है
कभी कभी शोर में आक्रोश उबलता है
खामोश रहो
ख़ामोशी में ही ताकत है
गुर्राना और गरजना तो किस को नहीं आता
खामोश रहो
कि ख़ामोशी की इक दुनिया सजी हुई है
जहां बातें हुआ करती हैं, चुप चाप
जहां आँखे खिल उठती हैं
जहां होंठ मुस्कुराते हैं
खामोश रहो
कि तुम्हें ज़माना क्या कुछ नहीं कहेगा
पर याद रहे, सोने पर दीमक असर नहीं करता
चाह कर भी नहीं
खामोश रहो
कि तुम शिखर हो, जो सर उठाए खड़ा है
गर्व से, अपने अस्तित्व के एहसास से
जो तुम सा हो जाए, तुम तक पहुँच जाए
कहेगा, "मैंने उसे छू लिया"
और जो न छू पाया, तो कह दे शायद
"कम्बखत ऊँचा बहुत है"
और इक बात कहूँ
समझ तो तुम जाओगे, मगर ज़रा देर से
ख़ामोशी जब ख़ामोशी तोड़ती है तो अच्छा नहीं होता
शराफत जब शराफत छोड़ती है तो अच्छा नहीं होता
जो केदारनाथ की होनी है
या कश्मीर की अनहोनी है
यह संकेत हैं,
बताने के तुम्हें
कि अब ख़ामोशी टूट चुकी है
कि अब शराफत छूट चुकी है
कि अब वह मौला तंग आ कर
इंसानो से इंसानों सा पेश आएगा
मुझे खौफ हैं तो बस इतना
अब और क्या क्या दिखाएगा
खामोश रहो
कि वोह मौला, ईश्वर, भगवान्
मुस्कुराता चला जाएगा, देता चला जाएगा
वर्ना
दुःख देता चला जाएगा, काफी कुछ लेता चला जाएगा
खामोश रहो
यही सीखा है मैंने
तुम्हें सवालों के जवाब मिल ही जाते हैं
ज़माने को उन के जवाब मिल ही जाते हैं
~ डिम्पेश राजानी

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